हरिद्वार। पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन स्थित मिनी ऑडिटोरियम में“मोटापे के प्रबंधन में योग और प्राकृतिक चिकित्सा का हस्तक्षेप (योगा एण्ड नैचरोपैथी इंटरवेशन इन द मैनेजमैंट ऑफ ओवरसिटी)”विषय पर एक दिन की कार्यशाला सम्पन्न हुई।कार्यशाला का उद्देश्य मोटापे के बढ़ते मामलों और इसकी असरदार रोकथाम और प्रबंधन में योग और प्राकृतिक चिकित्सा की भूमिका के विषय में जागरूकता फैलाना था।कार्यक्रम में स्वामी परमार्थदेव ने मोटापे जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों को रोकने में यौगिक प्रैक्टिस,नेचुरल लाइफ स्टाइल और अनुशासित जीवन के महत्व पर ज़ोर दिया।उनके प्रेरणादायी शब्दों ने प्रतिभागियों को सुस्वास्थ्य के लिए एक होलिस्टिक अप्रोच अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।गेस्ट स्पीकर डॉ.श्वेता मिश्रा,आयुष मेडिकल ऑफिसर,एम्स ऋषिकेश ने मॉडर्न समाज में मोटापे की बढ़ती चिंता पर एक जानकारी भरा और दिलचस्प लेक्चर दिया।उन्होंने बताया कि कैसे योग प्रैक्टिस ,नेचुरोपैथी थेरेपी,सही डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव मोटापे को मैनेज करने और पूरी हेल्थ को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।नेचुरोपैथी और यौगिक साइंसेज फैकल्टी के डायरेक्टर,डॉ.अनिल वर्मा ने प्रतिभागियों को संबोधित किया और योग और नेचुरोपैथी के ज़रिए प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को बढ़ावा देने के लिए अवेयरनेस प्रोग्राम और एकेडमिक स्तर पर पहल करने के महत्व पर ज़ोर दिया।कार्यशाला के दौरान डॉ.श्वेता मिश्रा को उनके योगदान और प्रतिभागियों के साथ अपनी जानकारी साझा करने के लिए सम्मानित भी किया गया।विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.कनक सोनी ने“मोटापे और घर की दिनचर्या के विषय में अवेयरनेस (अवेयरनेस ऑफ ओवरसिटी एण्ड होम रूटीन)”विषय पर एक ज्ञानवर्धन व्याख्यान दिया।उन्होंने घर के प्रैक्टिकल रूटीन,डाइट और आसान योग प्रैक्टिस के बारे में बताया,जिन्हें लोग मोटापे को असरदार तरीके से मैनेज करने के लिए अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल कर सकते हैं।कार्यक्रम का सफल संचालन नेचुरोपैथी और योगिक साइंसेज फैकल्टी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.संगीता सिंह ने किया।नेचुरोपैथी और यौगिक साइंसेज फैकल्टी के डीन डॉ.तोरण सिंह के वोट ऑफ़ थैंक्स के साथ कार्यक्रम का समापन किया,उन्होंने वर्कशॉप आगंतुक अतिथिगणों,गेस्ट स्पीकर,फैकल्टी मेंबर्स और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।कार्यशाला फैकल्टी मेंबर्स डॉ.नागराज होसामनी,डॉ.नयन बिस्वास,डॉ.ललित कुमार चौधरी,डॉ.तनु,डॉ.सुमनलता,डॉ.आयुषी कामदार,डॉ.लक्ष्मी नायक,डॉ.स्वाति और डॉ.निधि पाठक के साथ-साथ पतंजलि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों व कर्मचारियों की उपस्थिति एवं सहयोग से संचालित की गई।कार्यक्रम में प्रति-कुलपति,कुलानुशासिका एवं मानविकी संकायाध्यक्ष,कुलसचिव,कुलानुशासक,डीन रिसर्च,डीन साइंस,परीक्षा नियंत्रक,सहायक-कुलसचिव ,निदेशक-दूरस्थ शिक्षा एवं सहायक-निदेशक दूरस्थ शिक्षा का विशेष सहयोग रहा।
